
(0 2 अगस्त 2022, दिल्ली, राजधानी)
दिल्ली।एक महिला को फर्जी रेप का मामला दर्ज कराना खासा भारी पड़ गया है। इस मामले में कथित तौर पर आरोपी व्यक्ति को न्याय मिला है और फर्जी रेप का मामला दर्ज करने वाली महिला को कोर्ट द्वारा अनोखी सजा दी है।
किसी भी महिला के साथ रेप की घटना उसे झकझोर कर रख देती है। रेप करने वाले को सख्त से सख्त सजा देने के लिए दुनियाभर में कानून बनाए गए हैं। इससे आरोपी को न केवल सजा होती है, बल्कि समाज में महिलाओं को गलत निगाह से देखने वालों को सख्त संदेश भी दिया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में महिलायें इस कानून का दुरुपयोग भी करती हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने इसकी गंभीरता को समझते हुए एक महिला को फर्जी रेप केस के लिए एक अनोखी सजा सुनाई है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को रेप का झूठा केस दर्ज करवाने वाली महिला को जस्टिस जसमीत सिंह ने एक नेत्रहीन स्कूल में समाज सेवा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 50 पेड़ लगाकर पाँच साल तक उसकी देखभाल करने के भी आदेश दिए हैं। इस सजा की सभी लोग सराहना कर रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, महिला एक व्यक्ति के साथ पैसों को लेकर विवाद चल रहा था। जब इसपर झगड़ा बढ़ा तो उसने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ रेप का मामला दर्ज करवा दिया था। महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि कथित आरोपी ने उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला प्रदार्थ मिलाकर पिलाया था जिससे वो बेहोश हो गई फिर उसके साथ रेप किया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये आरोप गलत निकला जिसके बाद कोर्ट ने शिकायतकर्ता और आरोपी बीच समझौता करवाया। इसके आधार पर रेप का मामला रद्द हो गया।
महिला ने माना कि पैसे न मिलने से परेशान होने पर दूसरों के बहकावे में आकर उसने ये मामला दर्ज करवाया था। कोर्ट को महिला का आचरण बहुत अनुचित लगा और इस तरह की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की बात कही।
कोर्ट के आदेश के अनुसार महिला को अखिल भारतीय नेत्रहीन परिसंघ, रोहिणी में दो महीने तक हफ्ते के 5 दिन, रोज 3 घंटे के लिए समाज सेवा करना है। रोहिणी क्षेत्र में ही उसे 50 पौधे लगाने के बाद अगले 5 सालों तक उनकी देखभाल के भी आदेश दिए हैं।साभार पत्रिका

इस्लाम हुसैन
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