जसपुर:ब्राइट स्टार्ट इंटरनेशनल एकेडमी में वाद-विवाद प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

बच्चों ने जेबखर्च और ऑनलाइन खेलों पर रखे तार्किक विचार

विद्यालय प्रबंधन परिवार ने दी विजेताओं को शुभकामनाएँ दीं

KMD न्यूज़ ब्यूरो

जसपुर।ब्राइट स्टार्ट इंटरनेशनल एकेडमी के विद्यार्थियों की अभिव्यक्ति क्षमता और बौद्धिक विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वाद-विवाद प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कनिष्क वर्ग (कक्षा 6 से 8) में वाद विवाद का विषय था क्या बच्चों को जेब खर्च देना चाहिए? बच्चों ने आत्मनिर्भरता, बचत की आदत और जिम्मेदारी के पक्ष में तर्क दिए, वहीं अपव्यय और लापरवाही के आधार पर विरोधी विचार भी सामने आए। इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करते हुए टेरेसा सदन की आस्था काम्बोज ने प्रथम स्थान व कलाम सदन की राधिका अग्रवाल ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, वहीं गांधी सदन से विराट सिंह तृतीय स्थान पर रहे। प्रतियोगिता में विपक्ष में अपने विचारोत्तेजक कथनों से निर्णायक मंडल को अभिभूत करके कलाम सदन से सारा अज़ीम ने प्रथम स्थान, गांधी सदन से आयुषी पायला ने द्वितीय स्थान तथा राधाकृष्णन सदन से गिरिजा राठौर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।


वरिष्ठ वर्ग (कक्षा 9 से 12) में वाद विवाद का विषय था– क्या ऑनलाइन खेलों ने बच्चों को आक्रामक बना दिया है? इसमें
कुछ प्रतिभागियों ने इसका नकारात्मक पहलू आक्रामक प्रवृत्ति और तनाव को बताया, जबकि अन्य ने तकनीकी ज्ञान, मानसिक कौशल और प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक पक्ष के रूप में प्रस्तुत किया। इसके पक्ष में टेरेसा सदन से वाणी चौहान प्रथम स्थान पर, गांधी सदन से आदित्य काम्बोज द्वितीय स्थान पर तथा कलाम सदन से सुहानी गुम्बर तृतीय स्थान पर रहे। वहीं विपक्ष में कलाम सदन से जिज्ञासा चौहान प्रथम स्थान पर, गांधी सदन से इधान्त चौहान द्वितीय स्थान पर व राधा कृष्णन सदन से देवांश गहलोत तृतीय स्थान पर रहे।
प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय का सभागार तालियों से गूंज उठा। निर्णायक मंडल में प्रफुल्ल कुमार, डॉ रश्मि कोहली, अरुंधति चौहान, अमरप्रीत बक्शी शामिल थीं। निर्णायकों ने बच्चों की तर्कशक्ति, प्रस्तुति और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी में वाद-विवाद जैसी गतिविधियाँ नेतृत्व कौशल विकसित करती हैं।
वहीं कक्षा 11 के बच्चों ने मोबाइल के स्क्रीन टाइम पर किए गए अपने शोध को एक नाटक द्वारा बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रफुल्ल कुमार ने छात्रों को बचत के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यदि हम सही तरीके से पैसे की योजना बनाकर बचत करें तो न केवल पैसा सुरक्षित रहता है, बल्कि समय के साथ बढ़ता भी है।
साथ ही उन्होंने छात्रों को साइबर फ्रॉड से बचने के उपाय भी बताए और समझाया कि आज के डिजिटल युग में सावधानी बरतना कितना ज़रूरी है। उन्होंने रूल 72 का सरल उदाहरण देते हुए कहा कि यदि धनराशि को उचित निवेश में लगाया जाए, तो लगभग 7 से 10 साल में पैसा दोगुना हो सकता है।
श्रीमती अरुंधति चौहान जी ने भी अपने अनुभव बताकर बच्चों को पैसा जोड़ने के गुण बताए और हिंदी भाषा के महत्व को स्वामी विवेकानंद जी का उदाहरण देकर समझाया ।
डॉ० रश्मि कोहली ने छात्रों को यह बताया कि डोपामिन हमारे शरीर में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण रसायन है, जिसे “हैप्पी हार्मोन” भी कहा जाता है। यह हार्मोन हमारे दिमाग में खुशी, प्रेरणा और एकाग्रता की भावना को नियंत्रित करता है। जब डोपामिन का स्तर संतुलित रहता है तो व्यक्ति ऊर्जावान, प्रसन्न और सक्रिय महसूस करता है। उन्होंने यह भी समझाया कि ऑनलाइन खेलों के की लत , अधिक स्क्रीन टाइम और अस्वस्थ जीवनशैली डोपामिन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं और बच्चों को आक्रामक बना सकते हैं । संतुलित जीवन, आहार, व्यायाम, पर्याप्त नींद, कम से कम स्क्रीन टाइम और सकारात्मक सोच से डोपामिन का स्तर स्वाभाविक रूप से संतुलित किया जा सकता है।

प्रधानाचार्या मधु शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि “वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को सही-गलत में भेद करने की क्षमता, आलोचनात्मक सोच , समस्या निराकरण क्षमता और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं।इस प्रकार के कार्यक्रम ही बच्चों में नेतृत्व, अभिव्यक्ति और जिम्मेदारी की भावना का निर्माण भी करते हैं और चरित्र निर्माण में भी सहायक होते हैं ।”

विद्यालय के प्रबंधन परिवार की सदस्या भावना कांबोज जी व साक्षी कांबोज इस अवसर पर उपस्थित थीं और उन्होंने अवसाद पर अपने विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने सभी विजेताओं को शुभकामनाएँ भी दीं और आश्वासन दिया कि विद्यालय भविष्य में और भी ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित करेगा ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास उनके भावनात्मक विकास को साथ रखते हुए हो सके। बताते चलें सीबीएसई दिनांक 10 सितंबर से 16 सितंबर तक विश्व आत्महत्या रोको दिवस के अंतर्गत बातचीत से बातों को बदलकर सोच को सकारात्मक बनाने का एक सुंदर प्रयास कर रहा है जिसके अंतर्गत आज की यह महत्वपूर्ण संगोष्ठी रखी गई जो कि बहुत सफल रही। बच्चों ने खुलकर डॉक्टर रश्मि से सभी प्रश्नों के हल प्राप्त किए।
सभी अतिथियों को सत्कार स्वरूप पौधे और आभार व्यक्त किया गया।

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