कोटाबाग मे भाजपा-कांग्रेस के बीच ब्लॉक प्रमुख की जंग तेज

कोटाबाग में तीसरे मोर्चे की भूमिका अहम,

भाजपा को मिली करारी शिकस्त

तीनों जिला पंचायत सीटों पर हार, अब ब्लॉक प्रमुख पद पर प्रतिष्ठा दांव पर

(मेहरा संवददाता)

कालाढूंगी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कोटाबाग

ब्लॉक से भाजपा को बड़ा झटका लगा है। भाजपा का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में पार्टी तीनों जिला पंचायत सदस्य सीटें हार गई है। इस पराजय के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी बचाने की कवायद में जुट गई है। वहीं कांग्रेस और संभावित तीसरे

मोर्चे के उम्मीदवारों ने भी समीकरणों को साधने की कोशिश शुरू कर दी है। भाजपा की ओर से कोटाबाग ब्लॉक प्रमुख पद के लिए कई दावेदार सामने आ चुके हैं, जिनमें कालाढूंगी मंडल अध्यक्ष विक्रम जंतवाल की धर्मपत्नी मनीषा जंतवाल को प्रबल दावेदार माना को जा रहा है। पार्टी के अंदरखाने में टिकट लेकर खींचतान तेज हो गई है, और यदि टिकट वितरण में असंतोष गहराया, असंतुष्ट नेताओं के तीसरे मोर्चा तो

बनाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस नेता पियूष बिष्ट ने अपनी धर्मपत्नी चित्रा बिष्ट को एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन कांग्रेस चित्रा बिष्ट के नाम को आगे बढ़ाया है। के भीतर उपजे मतभेद और गुटबाजी से तस्वीर साफ नहीं है। यदि कांग्रेस में एकता नहीं बन पाई, तो तीसरे मोर्चे को अवसर मिल सकता है। पार्टी के लिए चिंता की बात यह है कि

कोटाबाग ब्लॉक की तीनों जिला पंचायत सीटों पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है, जिसमें से एक सीट कांग्रेस और दो निर्दलीयों के खाते में गई हैं। भाजपा की कमजोर स्थिति और कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान को देखते हुए ब्लॉक प्रमुख पद पर तीसरे मोर्चे की भूमिका निर्णायक हो सकती है। संभावित निर्दलीय व असंतुष्ट नेताओं का गठजोड़ कोटाबाग में राजनीतिक

संतुलन बिगाड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि भाजपा किस चेहरे पर दांव खेलती है और कांग्रेस अपनी गुटबाजी से पार पाकर एकजुट नहीं। दोनों ही प्रमुख दलों के लिए उम्मीदवार मैदान में उतार पाती है या कोटाबाग ब्लॉक प्रमुख का चुनाव प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

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