श्रद्धा के साथ मनाया करवाचौथ का पर्व,पति की दीर्घायु की कामना

शक्तिफार्म। नगर में करवाचौथ का पर्व अत्यंत श्रद्धा, आस्था और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए पूजा-पाठ की तैयारी शुरू कर दी। नगर के विभिन्न मोहल्लों ग्रामसभा टैगोर नगर, अरविंद नगर, बैकुंठपुर, पड़ागांव, सुरेंद्र नगर, जेल कैंप, रुदपुर, निर्मल नगर, राज नगर, देव नगर, गुरुग्राम, तीलियापुर, आनंद नगर, बसगर, पिपलिया, जय नगर सहित मुख्य बाजार क्षेत्र में इस पवित्र पर्व की रौनक देखते ही बन रही थी। दिनभर महिलाओं ने निर्जला उपवास रखा और सोलह श्रृंगार कर शाम को चांद निकलने की प्रतीक्षा की। जैसे ही चांद की रजतमयी किरणें आसमान में झिलमिलाई, छतों और आंगनों में महिलाओं ने सजाई हुई पूजा की थाल से चांद का दर्शन किया।

छलनी से चांद देखकर पति का चेहरा निहारा और उनके दीर्घ जीवन की मंगलकामना करते हुए व्रत खोला। पति ने अपनी पत्नियों को पानी पिलाकर और मिठाई खिलाकर व्रत पूरा कराया। इस

अवसर पर घर-घर में खुशी और प्रेम का वातावरण छा गया। करवाचौथ हिंदू ध में में पति-पत्नी के पवित्र और अटूट बंध न का प्रतीक पर्व माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखती हैं।

यह व्रत केवल पति की लंबी उम्र के लिए ही नहीं बल्कि परिवार की समृद्धि और वैवाहिक सुख की स्थिरता के लिए भी किया जाता है। शक्तिफार्म में शाम के समय हर गली-मोहल्ले की छतों पर करवाचौथ की रौनक देखने को मिली। लाल साड़ियों और चुनरियों में सजी महिलाएं थाल में दीप, रोली, चावल, जल का लोटा और मिठाई रखकर पूजा करती नजर आईं। चांद निकलते ही एक साथ पूरे नगर से आरती और गीतों की आवाज गूंज उठी” चांद ने अपनी चांदनी से कहा, आ तेरा करवाचौथ आया।” व्रत पूर्ण होने के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को बधाई दी और पारंपरिक व्यंजन जैसे पूड़ी, कचौड़ी, हलवा, दाल-चावल आदि का आनंद लिया। कई परिवारों ने सामूहिक रूप से रात्रिभोज का आयोजन भी किया, जिससे पूरे नगर में मिलनसार और पारिवारिक सौहार्द का वातावरण बन गया।

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