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ब्राइट स्टार्ट इंटरनेशनल एकेडमी में साइबर अपराध एवं बाल सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


पॉक्सो अधिनियम और साइबर ठगी से बचाव के बताए उपाय, विद्यार्थियों को वास्तविक घटनाओं के उदाहरण देकर किया जागरूक

बच्चों की सुरक्षा, अधिकारों और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ब्राइट स्टार्ट इंटरनेशनल एकेडमी, जसपुर में शनिवार को विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के तत्वावधान में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधम सिंह नगर द्वारा 26 से 31 अक्टूबर तक चलाए जा रहे ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण—हर बच्चे का अधिकार’ अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ऊधम सिंह नगर की पीएलबी टीम से डॉ. वीर सिंह गौतम, श्री आकाश कुमार, श्री विकास कुमार, श्री दीपक कुमार, श्रीमती मुनेश एवं श्रीमती लता उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों का पौधे भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्री विकास कुमार ने विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आजकल केवाईसी अपडेट कराने, बैंक संबंधी जानकारी लेने और अन्य आकर्षक संदेशों के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है। कई बार लोगों को साइबर धोखाधड़ी का पता तब चलता है, जब उनके बैंक खाते से धनराशि निकल चुकी होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या संदेश पर तुरंत विश्वास नहीं करना चाहिए और ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय शांत दिमाग से सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने रुद्रपुर क्षेत्र में साइबर अपराधों में संलिप्त पाए गए 826 केंद्रों को बंद कराए जाने की जानकारी भी साझा की। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि साइबर अपराध से संबंधित शिकायत और सहायता के लिए रुद्रपुर में साइबर थाना स्थापित है। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने वास्तविक जीवन की घटनाओं के उदाहरण देकर बच्चों को ऑनलाइन सतर्कता का महत्व समझाया।

वहीं, वीर सिंह गौतम ने विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act), 2012 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की भूमिका और बच्चों को मिलने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि यौन शोषण की अनेक घटनाओं में आरोपी बच्चे का परिचित या जान-पहचान का व्यक्ति भी हो सकता है। इसलिए किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति लगातार पीछा करता है या किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार करता है, तो इसकी जानकारी तुरंत अपने अभिभावकों और विश्वसनीय शिक्षकों को देनी चाहिए। उन्होंने गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाते हुए बच्चों को अपने शरीर की सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि यौन उत्पीड़न से संबंधित अनुचित व्यवहार और अशोभनीय हरकतें भी कानून के दायरे में आ सकती हैं। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत अपराधों के लिए निर्धारित कठोर दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में छात्राओं की सुरक्षा, महिला हेल्पलाइन एवं चाइल्ड हेल्पलाइन के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बच्चों को किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न या असुरक्षित स्थिति में चुप न रहने तथा समय रहते उचित सहायता लेने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या श्रीमती मधु शर्मा ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से आए सभी अतिथियों एवं पीएलबी टीम के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को न केवल उनके अधिकारों की जानकारी देते हैं, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार करते हैं।

विद्यालय प्रबंधन ने भी इस आयोजन को विद्यार्थियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। विद्यालय में समय-समय पर ऐसे जागरूकता एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक, कानूनी और डिजिटल सुरक्षा के प्रति भी जागरूक बनाना है। विद्यालय प्रबंधन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उन्हें एक सुरक्षित, जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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